विप्लव विकास: भारतीय विचारक, स्तंभकार, लेखक, शोधकर्ता और पुस्तक प्रेमी, जो सांस्कृतिक विचारों और पुस्तकों के प्रति अपने प्रेम से लोगों को प्रेरित करते हैं।
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हमें युवाओं से संवाद की भाषा भी बदलनी होगी। हमें उनसे यह कहने के बजाय कि "तुम आसानी से बहकावे में आ जाते हो", यह कहना होगा कि “तुम्हारे पास भ्रामक सूचनाओं को रोकने की सबसे बड़ी क्षमता है।”
यहीं से 'डिजिटल डिफेंस फोर्स' का विचार जन्म लेता है। इसके लिए किसी वर्दी, सीमा-चौकी या औपचारिक भर्ती की आवश्यकता नहीं है।
किसी देश को कमजोर करने के लिए हमेशा उसकी सीमा पर हमला करना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी उसके समाज के भीतर मौजूद पहचान की रेखाओं को इतना गहरा कर देना पर्याप्त होता है कि नागरिक एक-दूसरे को नागरिक की तरह देखना बंद कर दें। फिर पड़ोसी पहले बंगाली, बिहारी, पंजाबी या मराठी हो जाता है; बैकवार्ड या फारवर्ड हो जाता है; किसी जाति, विचारधारा या राजनीतिक दल का समर्थक हो जाता है, और अंत में भारतीय।
आधुनिक दौर में एक दावा केवल एक खबर नहीं रहता, वह एक इकनोमिक वेपन और राष्ट्रीय परिसंपत्तियों के अवमूल्यन का जरिया बन जाता है। इसे ही हम 5जीडब्लू कहते हैं, जहाँ युद्ध की प्रकृति अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह शेयर बाजार, वैश्विक साख और पब्लिक परसेप्शन को सीधी चोट पहुँचाती है।
ताम्रलिप्त जातीय सरकार केवल 1942 के आंदोलन की एक घटना नहीं थी, बल्कि यह इस बात का ऐतिहासिक प्रमाण थी कि भारत का समाज विदेशी हुकूमत के बिना भी एक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक और कल्याणकारी शासन चलाने में सक्षम था।
पिछले स्तंभ में हमने देखा था कि किसी घटना की कहानी किस तरह हमारी धारणा को प्रभावित कर सकती है। इस बार सवाल है कि वह कहानी हमारे पास पहुँचती कैसे है? 5GW के महत्वपूर्ण टूल्स के बारे में चर्चा होगी।
भारत की लोकतांत्रिक शक्ति केवल इस बात में नहीं है कि यहाँ करोड़ों लोग अपनी बात कह सकते हैं; असली शक्ति तब होगी जब करोड़ों नागरिक दूसरे की कहानी सुनकर भी अपना विवेक बचाए रख सकें। हमें न हर नैरेटिव को प्रोपगैंडा मानना है, न हर प्रोपगैंडा को झूठ और न हर असहमति को दुश्मनी। हमें केवल इतना सीखना है कि तथ्य कहाँ समाप्त होता है और उसकी बनाई हुई कहानी कहाँ से शुरू होती है।
आज 4 जीडब्लू के साथ इनफार्मेशन वारफेयर, साइबर, साइकोलॉजिकल, इन्फ्लुएंस ऑपरेशन्स और हाइब्रिड वारफेयर जैसे कई शब्दों का इस्तेमाल होता है। ये सभी समानार्थी नहीं हैं, लेकिन इनमें एक साझा तत्व दिखाई देता है; प्रतिद्वंद्वी की क्षमता के साथ-साथ उसकी धारणा, विश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करना।
भारत के भीतर से लेकर विदेशों में बैठी भारत-विरोधी ताकतों और ग्लोबल मार्केट फोर्सेज के गठजोड़ ने हमारे देश की संप्रभुता और शांति पर एक डिजिटल माध्यम से जमीनी स्तर मल्टीफेस्ड हमला बोला था।
विप्लव विकास की जनसांख्यिकीय सत्यान्वेषण की शृंखला की इस पहली कड़ी में आइए जानते हैं कि कैसे राष्ट्रों की नियति उसकी जनसांख्यिकीय रचना तय करती है।
"भारत क्यों निशाने पर?" पुस्तक के लेखक विप्लव विकास से जानिए क्यों यह किताब भारत के खिलाफ चल रहे नैरेटिव युद्ध, हाइब्रिड वॉरफेयर और मिशनरियों की रणनीतिक घेराबंदी को बेनकाब करने वाली सत्यान्वेषण की एक महत्वपूर्ण यात्रा है।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त चुनाव है और विडंबना यह है कि चुनाव ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन जाते हैं, जब उन्हें अविश्वसनीय बनाने का खेल शुरू होता है। दुनिया ने बार-बार देखा है कि जैसे ही कोई विपक्ष चुनाव हारता है, अचानक "धांधली" का शोर उठता है। यह महज़ नाराज़गी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति होती है जिसे वैश्विक राजनीति में कलर रिवोल्यूशन के नाम से जाना जाता है।
16 जुलाई 2025 को कोलकाता की सड़कों पर भारी बारिश के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस 'बांग्ला अस्मिता' के नाम पर रैली निकाली, वह दरअसल बंगाल की संस्कृति और अस्मिता को बचाने का नहीं, बल्कि उसे खंडित और कमजोर करने का एक सुनियोजित राजनीतिक प्रयास था।